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इड़ा पिंगला और सुषम्ना नाड़ी- आध्यात्मिक यात्रा की सीढ़ी

इड़ा पिंगला और सुषम्ना नाड़ी- आध्यात्मिक यात्रा की सीढ़ी
इड़ा पिंगला और सुषम्ना नाड़ी- आध्यात्मिक यात्रा की सीढ़ी

नमस्कार इस ब्लॉग में आपका स्वागत है आज हम बात करेंगे इड़ा पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी के बारे में:-


                    वैसे तो हमारे शरीर में 72000  नाड़ियां होती हैं पर उनमें से तीन मुख्य नाड़ियां होती हैं, वह इड़ा पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी | नाड़ी शब्द एक संस्कृत शब्द से लिया गया है इसका मतलब है -नाली जैसा प्रवाह | इन नाड़ियों के माध्यम से प्राण वायु हमारे शरीर में विकसित होती है और हमें ऊर्जा प्रदान करती हैं | जब हमारे  बाय ओर के नाक के छिद्र से श्वास आती है, प्राणवायु आती है तब इड़ा नाडी चल रही होती है | इस नाड़ी को चंद्रमा की संज्ञा दी गई है और जब हमारे दाय ओर के नाक के छिद्र श्वास आ रही होती है- तब पिंगला नाड़ी चल रही होती है, इसे सूर्य की संज्ञा दी गई है शास्त्रों में सूर्य को हमारे पिता की संज्ञा दी गई है और चंद्रमा को हमारी माता की संज्ञा दी गई है | अगर हमारी इड़ा और पिंगला नाड़ी संतुलित है सही है तो ही हमारा शरीर स्वस्थ रह सकता है |



ida pingla sushmna nadi


कबहु इड़ा स्वर चलत है , कभी पिंगला माहि,
सुष्मन इनके बीच बहत है गुर बिन जाने नहीं

    जैसे की हमारे नाक के बाय ओर से सांस आ रही है तो इड़ा नाडी चल रही है और अगर दाय ओर के नाक  से सांस आ रही है तो पिंगला नाड़ी चल रही है | जब हमारी इड़ा और पिंगला नाड़ी चल रही होती है, उस समय  हमें सांसारिक, दुन्यावी या भौतिक काम करने चाहिए | इड़ा और पिंगला नाड़ी के चलते समय हम कोई भी संसारिक या भौतिक काम करेंगे, तो उसमें हमें तरक्की उन्नति की प्राप्ति होती है | पर जब यह नाड़ियां चल रही होती है उस समय हम आध्यात्मिक उन्नति नहीं कर सकते | ज्यादातर लोग पीड़ा और पिंगला नाड़ी में ही जीते और मरते हैं |

ज्यादातर लोगों की सुषुम्ना नाड़ी निष्क्रिय ही रह जाती है, औऱ वो आध्यात्मिक यात्रा के बिना ही अपने मनुष्य जन्म को पार कर जाते है | इस तरह से मनुष्य जन्म का मूल मकसद शुरू होने से पहले ही ख़तम हो जाता है |


  अब हम आगे बात करते हैं सुषुम्ना नाड़ी के बारे में दोनों नाड़ी के मध्य में
सुषम्ना नाड़ी स्थित है | सुषुम्ना नाड़ी के विकसित होने से हम पारदर्शी हो जाएंगे |

अगर आप इड़ा और पिंगला नाड़ी के प्रभाव में हैं तो आप संसार की बाहरी सुख दुःख को देखकर को प्रतिक्रिया करेंगे | अगर आपके ज़िन्दगी के surrounding  अशांति है, तो आपका मन अशांत, विचलित रहेगा औऱ अगर आप को बहार सुख मिलता है तो आपको ख़ुशी मिलेगी |  लेकिन एक बार अगर आपकी सुषुम्ना नाड़ी में ऊर्जा का प्रवेश हो जाए, तो आप एक नए किस्म का संतुलन पैदा कर लेंगे | अगर आपके चारों ओर अशांति है तो अशांति से आप विचलित नहीं होंगे |  सुषुम्ना नाड़ी के विकसित होने से अशांति का स्थान शांति ले लेती है | आपका जीवन शांतिमय, सुखमय बन जाता है  | आपके सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन में बैलेंस बन जाता है और जब से बैलेंस बनना शुरू हो गया, तब से आपकी लाइफ स्वर्ग बन जाएगी | आपको जिंदगी जीने का मजा आ जाएगा |

          ऋषि मुनियों का दिया हुआ आशीर्वाद क्यों सत्य हो जाता है क्योंकि जब वह समाधि अवस्था में जाते हैं उनकी सुषम्ना नाड़ी चल रही होती हैं और आकाश तत्व भारी होता है, जिससे कोई भी की गई प्रार्थना, या कोई भी बात है, वह सत्य हो जाती है, पूरी हो जाती है, इसलिए उनका आशीर्वाद काम करता है | इसी तरह से अगर भी हम अपने सुषुम्ना नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह करेंगे, जब सुषमा नाड़ी चल रही हो उस समय हमें अपनी भक्ति पूजा-पाठ ज्ञान तप आदि करना चाहिए | उस समय किया हुआ कोई भी आध्यात्मिक काम पूरा होता है, सिद्ध होता है, उस टाइम हमारे द्वारा सोचा हुआ कोई भी  काम हमारा पूरा हो जाता है |

यह तीनों नाड़ीयां मूलाधार चक्र से निकलती है इसलिए मूलाधार चक्र को मुक्त त्रिवेणी (जहां से तीनों नारियां अलग होती हैं) कहां जाता है और आज्ञा चक्र युक्त त्रिवेणी (जहां तीनों नारियां आपस में मिल जाती हैं) कहां जाता है सुषुम्ना नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह होने से  शारीरिक और आध्यात्मिक विकास होता है, भविष्य में झांकने की क्षमता बढ़ जाती हैं | एक ही जगह बैठे हुए पूरी दुनिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

हम कैसे चेक करें कि हमारी कौन सी नाड़ी चल रही हैं ?

जब हम श्वास लेते हैं, अपने नाक के नीचे उंगली रख कर हमें देखना चाहिए कि जो हमारी श्वास है, वह किस नाक के छिद्र से आ रही हैं, अगर श्वास बाई ओर से आ रही है तो इड़ा नाड़ी चल रही है और श्वास दाईं ओर से आ रही है तो पिंगला नाड़ी चल रही है और अगर श्वास दोनों छिद्र से आ रही है तो सुषम्ना नाड़ी चल रही है |

हमें इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि जब हमारी सुषुम्ना नाड़ी चल रही हो, तो हमें सब संसारी कामों को बंद कर कर सिमरन जप, तप, पाठ पूजा आदि करना चाहिए ताकि हम अपने आध्यात्मिक यात्रा को शुरू कर सकें |

आज्ञा चक्र :- आत्मा का परमात्मा से मिलान का रास्ता


धन्यवाद

chakrs ki jankari  नमस्कार


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